दिल्ली और बहादुरगढ़ के बीच स्थित टीकरी बॉर्डर जो हरयाणा और दिल्ली को अलग करता है पर स्थित किसान धरनास्थल पर जाना हुुुआ। किसान आंदोलन के चलते आज के दिन टीकरी बॉर्डर किसान तीर्थ का रूप ले चुका है।
मेट्रो से उतरते ही सबसे पहले दिल्ली पुलिस ,BSF और वज्र वाहनों के साथ RAF के जवान दिखाई दिए, और उन्होंने रोकते हुए गलियों से घूमकर आंदोलन स्थल पर जाने को कहा। जब मैं आगे आंदोलन स्थल पर गया वहां युवा वालंटियर किसानों की सहायता के लिए कैम्प लगाए दिखे। सबसे पहले जमीदारा स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के कैंप में गया जहां मेरे परिचित के मीत मान और इंद्रजीत सांगवान JSO के अपने साथी युवा वालंटियरों के साथ लंगर सेवा करते हुए दिखाई दिए।वहीं कुछ अन्य जानकार युवा साथी प्रेमाराम सियाग ,अभिषेक लाकड़ा,और राहुल दादू से भी मिलना हुआ। उसके बाद धरना स्थल का जायजा लेने के लिए निकला तो देखा कहीं सुदूर पंजाब ,हरयाणा और अन्य प्रदेशों से आये किसान डेरा डाले हैं कहीं किसान माताएं बहने खाना बनाती रही हैं तो कहीं आसपास के गांवों हरयाणा /दिल्ली देहात के युवा और बच्चे किसानों से बात करते उनकी मांगों को समझने का प्रयास करते दिखे ,कुछ लोग ऐसे भी दिखाई दिए जो अपने परिवार और बच्चों सहित आये हुए हैं और आंदोलनकारी किसानों के साथ फ़ोटो खिंचवा रहे हैं शायद ये वो नौकरी पेशा किसान पुत्र हैं अपने बच्चों के साथ आकर किसानों को नैतिक समर्थन दे रहे हैं और अपनी अगली पीढ़ी को इन किसानों के संघर्ष का साक्षी बना भविष्य के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं। मंच से किसानों नेताओ के भाषण लगातार जारी हैं चारों और से जय जवान जय किसान के नारे गूंज रहे हैं ,हरयाणा पंजाब भाईचारे के नारे लग रहे हैं।आंदोलन स्थल पर आने वाले हर व्यक्ति के लिए लंगर में खाने की सुविधा है। मात्र किसान या किसान आंदोलन में आने वाले समर्थक ही नहीं आसपास के गरीब मजदूर और बच्चे भी लंगर में खाना खा रहे हैं। हरयाणा के गांवों से लंगर के लिए सब्जियां ,चाय ,चीनी आदि की आपूर्ति निरंतर जारी है ।मेरे सामने ही हरयाणा से एक भाई अपनी गाड़ी से मटर टमाटर आदि सब्जियां लेकर JSO के कैम्प में आये। कैम्प संचालक ने बताया कि एक गांव से फोन आया कि 50 क्विंटल गेंहू इकट्ठा कर लिया है बताओ कब पहुंचाए ? मतलब अगर किसानों को ज्यादा समय भी रुकना पड़ा तो खाने पीने की कमी नहीं आने दी जाएगी ये तय है।
दिन भर की थकान को मिटाने के लिए शाम को किसानों द्वारा रागनी प्रोगाम रखा हुआ था ,जिसमें सबसे पहले एक कलाकार ने शहीद भगत सिंह की रागनी से शुरुआत की एवं इसी तरह जब तक मैं वहां रहा देशभक्ति ,किसानों सर छोटूराम जी और किसानी मुद्दों से सम्बंधित गीत रागनियां गाई जा रही थी। हरयाणवी सुपर स्टार अजय हुड्डा ने भी मंच पर आकर किसानों की मांगो का समर्थन किया और किसानों पर एक गीत प्रस्तुत किया।लौटते समय मैंने कुछ दुकानदारों से उनकी बिक्री और आंदोलन से उन्हें होने वाली समस्या और किसानों के बारे में चलते चलते कुछ पूछा जिसमें से एक आध ने अनुसार दुकानदारी प्रभावित हुई लेकिन ज्यादातर ने कहा कि दुकानदारी प्रभावित नहीं हुई..और किसानों का आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनका व्यवहार सराहनीय है।
अंत में मैं एक बात जोर देकर फिर से कहना चाहूंगा कि ये मात्र किसान आंदोलन धरनास्थल नहीं आज के दिन किसान तीर्थ का रूप ले चुका है । किसान बिलों के समर्थको को और साथ ही टीवी आदि के दुष्प्रचार के प्रभाव में आकर किसानों के बारे में नकारात्मक धारणा बनाये बैठे हर व्यक्ति को किसानों के बीच जाना चाहिये और उनसे मिलकर खुद विश्लेषण करना चाहिए कि वो दुष्प्रचार में कितनी सच्चाई है।
जय श्री किसान
